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Sunday, August 16, 2026

 

રામ કથા - 982

માનસ ગુરુ પ્રસાદ

Harvard, Massachusetts, USA

શનિવાર, તારીખ 15/08/2026 થી રવિવાર, તારીખ 23/08/2026

મુખ્ય પંક્તિઓ

गुर प्रसाद सब जानिअ राजा।

कहिअ न आपन जानि अकाजा॥

मख रखवारी करि दुहुँ भाईं।

गुरु प्रसाद सब बिद्या पाईं॥

सहित समाज तुम्हार हमारा।

घर बन गुर प्रसाद रखवारा॥

 

 

 

Saturday, 15/08/2026

नाम तुम्हार प्रताप दिनेसा। सत्यकेतु तव पिता नरेसा॥

गुर प्रसाद सब जानिअ राजा। कहिअ न आपन जानि अकाजा॥1॥

तुम्हारा नाम प्रतापभानु है, महाराज सत्यकेतु तुम्हारे पिता थे। हे राजन्‌! गुरु की कृपा से मैं सब जानता हूँ, पर अपनी हानि समझकर कहता नहीं॥1॥

 

मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी॥

मख रखवारी करि दुहुँ भाईं। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाईं॥1॥

हे तात! मैं बलैया लेती हूँ, मुनि की कृपा से ही ईश्वर ने तुम्हारी बहुत सी बलाओं को टाल दिया। दोनों भाइयों ने यज्ञ की रखवाली करके गुरुजी के प्रसाद से सब विद्याएँ पाईं॥1॥

 

सहित समाज तुम्हार हमारा। घर बन गुर प्रसाद रखवारा॥

मातु पिता गुर स्वामि निदेसू। सकल धरम धरनीधर सेसू॥1॥

 

गुरुजी का प्रसाद (अनुग्रह) ही घर में और वन में समाज सहित तुम्हारा और हमारा रक्षक है। माता, पिता, गुरु और स्वामी की आज्ञा (का पालन) समस्त धर्म रूपी पृथ्वी को धारण करने में शेषजी के समान है॥1॥

मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के॥

हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से॥

 

विषयरूपी साँप का जहर उतारने के लिए मंत्र और महामणि हैं। ये ललाट पर लिखे हुए कठिनता से मिटनेवाले बुरे लेखों (मंद प्रारब्ध) को मिटा देनेवाले हैं। अज्ञानरूपी अंधकार को हरण करने के लिए सूर्य किरणों के समान और सेवकरूपी धान के पालन करने में मेघ के समान हैं।

सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के॥

जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के॥

 

ज्ञान, वैराग्य और योग के लिए सद्गुरु हैं और संसाररूपी भयंकर रोग का नाश करने के लिए देवताओं के वैद्य (अश्विनीकुमार) के समान हैं। ये सीताराम के प्रेम के उत्पन्न करने के लिए माता-पिता हैं और संपूर्ण व्रत, धर्म और नियमों के बीज हैं।

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